जब कभी मैं,
आऊँ तुम्हारे पास,
अपने कंधे से
दूसरे बोझ हटा देना ।
देना अपने कंधे का सहारा,
मेरा सुकून में आशियाना बना देना,
कुछ पूछना नहीं, ना कुछ बताना,
उन खामोश लम्हों को,
कर बंद आँखें बिताना ।
जताना अपनी मोहब्बत तो,
अपने हाथों से मेरा सर सहलाना,
फिर छेड़ना कोई किस्सा,
और अपना हाल बताना ।
मैं सब बाँट लूँगी तुम्हारा ग़म,
मुझसे ऐसा कुछ कह जाना,
बस मेरा सुकुन तुमसे है,
अपने कांधे से, मेरा सिर ना हटाना ।

आऊँ तुम्हारे पास,
अपने कंधे से
दूसरे बोझ हटा देना ।
देना अपने कंधे का सहारा,
मेरा सुकून में आशियाना बना देना,
कुछ पूछना नहीं, ना कुछ बताना,
उन खामोश लम्हों को,
कर बंद आँखें बिताना ।
जताना अपनी मोहब्बत तो,
अपने हाथों से मेरा सर सहलाना,
फिर छेड़ना कोई किस्सा,
और अपना हाल बताना ।
मैं सब बाँट लूँगी तुम्हारा ग़म,
मुझसे ऐसा कुछ कह जाना,
बस मेरा सुकुन तुमसे है,
अपने कांधे से, मेरा सिर ना हटाना ।
