फिसल जातें हैं लोग भरी मुठ्ठी रेत की तरहना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन
बेहद ही करीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोईView attachment 311413
ना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन
बेहद ही करीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोईView attachment 311413
Bahut khub...ना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन
बेहद ही करीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोईView attachment 311413
AmazingView attachment 311469बिछड़ने से ज़रा पहले .....
तुमको मैंने बताना था...
हाँ मुझे तुमसे मोहब्बत है.. मैंने ये जताना था..
बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने बताना था... बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था....
कहना बहुत कुछ था तुमसे पर शायद शब्द ना थे मेरे पास.. बिछड़ने से ज़रा पहले कुछ भी बयान ना कर पाया मैं .. कैसा ये अफ़साना था..
बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था.. बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था...
वक्त की रेत हाथों से, कुछ यूं फिसल गई.फिसल जातें हैं लोग भरी मुठ्ठी रेत की तरह
लगता तो ऐसा हैं, की हैं मेरे पास पर ज़ब
मुठ्ठी खोलो तो धूल तक न रहती हातो मे![]()
न जी भर के देखा न कुछ बात कीBahut khub...
Par socho to..
दीदार जो उनका हुआ मानो
ईद के चाँद सा मेरा यार हुआ,
इस बरस तो जी भर के देखा
अगले बरस का फिर से इंतेज़ार हुआ।
क्या हुआ जो थाम ना सके
हाथ, पकड़ न सके दामन,
इतने करीब से गुजरे वो
देख के प्यारा एहसास तो हुआ।
उसे मैं याद आता तो हूँ फुरसत के लम्हों मे समीर,View attachment 311469बिछड़ने से ज़रा पहले .....
तुमको मैंने बताना था...
हाँ मुझे तुमसे मोहब्बत है.. मैंने ये जताना था..
बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने बताना था... बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था....
कहना बहुत कुछ था तुमसे पर शायद शब्द ना थे मेरे पास.. बिछड़ने से ज़रा पहले कुछ भी बयान ना कर पाया मैं .. कैसा ये अफ़साना था..
बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था.. बिछड़ने से ज़रा पहले तुमको मैंने पाना था...
Kya baat heवक्त की रेत हाथों से, कुछ यूं फिसल गई.
जिंदगी समझे जब तक, जिंदगी निकल गई.
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किया था वादा ता-उम्र, इमदाद का उसने
मुश्किलों मे किस्मत की भी, नीयत बदल गई.
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बेमन उदास बैठी थी, तन्हाई में जब शाम
आमद जो उसकी हुई तो, तबियत बहल गई.
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दुनिया की बंदिशों का, हमें इल्म है मगर
उसे पाने की फिर भी, ख्वाहिश मचल गई.
दिल के करीब था, हाथों से दूर था,ना हाथ थाम सके ना पकड़ सके दामन
बेहद ही करीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोईView attachment 311413
दर्द दे मुहब्बत की याद है फसानादिल के करीब था, हाथों से दूर था,
बस एक लम्हे में बेगाना हुआ कोई।