एक समय ऐसा आता है,
आप निराश हो चुके होते हैं...
रिश्तों से, लोगों से, जीवन से, सबसे,
यहां तक कि ईश्वर से भी...
तभी;
बड़े धैर्य के साथ आता है 'प्रेम'
आपका माथा चूम के,
दोनो हाथ से थामता है आप का चेहरा और प्यार भरी निगाहों से आप के आंखो में देखते हुए ये कहने कि...
मैं हूं ना !
(मेरे साथ होने के लिए तुम्हारा आभार।)

आप निराश हो चुके होते हैं...
रिश्तों से, लोगों से, जीवन से, सबसे,
यहां तक कि ईश्वर से भी...
तभी;
बड़े धैर्य के साथ आता है 'प्रेम'
आपका माथा चूम के,
दोनो हाथ से थामता है आप का चेहरा और प्यार भरी निगाहों से आप के आंखो में देखते हुए ये कहने कि...
मैं हूं ना !


(मेरे साथ होने के लिए तुम्हारा आभार।)
