Phir Se Udd Chala ...
मिट्टी जैसे सपने ये
कित्ता भी पलकों से झाड़ो
फिर आ जाते हैं
इतने सारे सपने
क्या कहूँ किस तरह से मैंने
तोड़े हैं, छोड़े हैं, क्यूँ?
फिर साथ चले, मुझे ले के उड़े ये क्यूँ?
मिट्टी जैसे सपने ये
कित्ता भी पलकों से झाड़ो
फिर आ जाते हैं
इतने सारे सपने
क्या कहूँ किस तरह से मैंने
तोड़े हैं, छोड़े हैं, क्यूँ?
फिर साथ चले, मुझे ले के उड़े ये क्यूँ?