मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।
वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
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कदम तो बढ़ाए, मगर राहें थम गईं,बहुत बढ़िया....
खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
Nice !मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।
वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
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bhai Sabse Aage Ap he ho bhai idhar .... waa bhai apke jesa koi nahi idharबहुत बढ़िया....
खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
अब भी कुछ कोरे पन्ने हे जो सजना बाकी हैँमोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।
वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
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खामोशीका सोर इतनी थी फिर भी ना सुनाई दी उसकोबहुत बढ़िया....
खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
अंत ही आरंभ है और कदाचित सत्य भी, किंतु मानवजाति इस चीज़ से बहुत दूर है।अब भी कुछ कोरे पन्ने हे जो सजना बाकी हैँ
कुछ कहानी अधूरी होइ तो क्या हुवा
नहीं कहानी भी तो बन्ना बाकी हैँ
जिंदगी की वी तो बस एक हिस्से की
वक तो झलक थी
बाकी हिस्से तो अब भी पढ़ना बाकी हैँ
( अन्त ही नयी सुरुवात की पहेलि कदम हैँ )
दूर कहाँ बस सत्य से भागनेकी कोशिस क़रता हैँ परन्तु बचता नहींअंत ही आरंभ है और कदाचित सत्य भी, किंतु मानवजाति इस चीज़ से बहुत दूर है।![]()
अंत ही आरंभ है और कदाचित सत्य भी, किंतु मानवजाति इस चीज़ से बहुत दूर है।![]()
Satya Vachanदूर कहाँ बस सत्य से भागनेकी कोशिस क़रता हैँ परन्तु बचता नहीं![]()
Satya Vachan