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अधूरी कहानी

मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।


वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
:brokenheart:
 

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मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।


वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
:brokenheart:
बहुत बढ़िया....

खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
 
बहुत बढ़िया....

खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
कदम तो बढ़ाए, मगर राहें थम गईं,
आसमान देखा, तो उम्मीदें कम गईं,
जिनसे रौशनी की चाह थी मुझको,
वो चिराग भी बुझकर राख बन गईं :(
 
मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।


वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
:brokenheart:
Nice ! :clapping:
 
बहुत बढ़िया....

खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
bhai Sabse Aage Ap he ho bhai idhar .... waa bhai apke jesa koi nahi idhar :giggle: :heart1:
 
मोहब्बत किताबों सी थी, पर किस्मत अधूरी कहानी,
लिखे थे संग रहने के वादे, पर रह गई बस निशानी।


वो लफ्ज़ों में अमर था, मैं खामोशियों में गुम,
एक नाम जो दिल में था, अब धुंधला है हर कदम
:brokenheart:
अब भी कुछ कोरे पन्ने हे जो सजना बाकी हैँ
कुछ कहानी अधूरी होइ तो क्या हुवा
नहीं कहानी भी तो बन्ना बाकी हैँ
जिंदगी की वी तो बस एक हिस्से की
वक तो झलक थी
बाकी हिस्से तो अब भी पढ़ना बाकी हैँ
:fingercross:

( अन्त ही नयी सुरुवात की पहेलि कदम हैँ )
 
बहुत बढ़िया....

खामोशियों से बाहर तो निकल
कुछ दूर बस खुद के संग चल,
पाएगा तू एक नई रोशनी को
एक कदम आगे को तो चल...
खामोशीका सोर इतनी थी फिर भी ना सुनाई दी उसको
हाल-ए इस दिकला हाल बताऊ तो भी बताऊ मैं किस्को
सारा ज़माने को सुनाई दी इस दिल का पुकार

बस उसको सुनाइ ना दी सुन्ना था जिसको
 
अब भी कुछ कोरे पन्ने हे जो सजना बाकी हैँ
कुछ कहानी अधूरी होइ तो क्या हुवा
नहीं कहानी भी तो बन्ना बाकी हैँ
जिंदगी की वी तो बस एक हिस्से की
वक तो झलक थी
बाकी हिस्से तो अब भी पढ़ना बाकी हैँ
:fingercross:

( अन्त ही नयी सुरुवात की पहेलि कदम हैँ )
अंत ही आरंभ है और कदाचित सत्य भी, किंतु मानवजाति इस चीज़ से बहुत दूर है। :)
 
अंत ही आरंभ है और कदाचित सत्य भी, किंतु मानवजाति इस चीज़ से बहुत दूर है। :)
दूर कहाँ बस सत्य से भागनेकी कोशिस क़रता हैँ परन्तु बचता नहीं :Laugh1:
 
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